Dilawar Singh Being Dilawar/ Tools/

खिड़की से वाहर देखा, नजरे दूर तक जाती है। और छितिज पर टिक जाती है। वहा शून्यता का आभाष होता है। और वापस मैं देख लेता हूं, वही ब्लैक-बोर्ड क्लास का। जो रोज कुछ बताता है। क्या है ? क्या ज्ञात है। क्यों है , क्या अज्ञात है। – जनबरी २०, २००६